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पहली फिल्म के लिए जितेंद्र को दिए थे 100 रुपए, आज हैं हज़ारों करोड़ के मालिक

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पुराने समय के मशहूर अभिनेता जितेंद्र अपने समय में काफी प्रसिद्ध हुए थे। जितेंद्र ने अपनी पूरी सफलता केवल और केवल खुद की प्रतिभा के बल पर प्राप्त करी थी। बुरे समय में से अच्छे समय की ओर बढ़ते हुए जितेंद्र ने काफी सारी परेशानियां झेली। एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले जितेंद्र एक बहुत ही सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जिया करते थे उन्हें विराम वह मुंबई की एक चॉल में रहते थे।

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फिल्मी कर शांताराम ने दिया था पहला काम

जितेंद्र जब कॉलेज में पढ़ा करते थे तब उनके पिता का निधन हो गया था जिसके बाद परिवार का पूरा आर्थिक बोझ जितेंद्र के कंधों पर आ गया था। परंतु उस बुरी परिस्थिति में भी अपने आप को स्थिर बनाए रखते हुए जितेंद्र आगे बढ़ते रहे और अपने आर्थिक परिस्थिति को सपोर्ट देने के लिए जितेंद्र काम ढूंढने लगे। उस समय जितेंद्र को पहली बार काम दिया उस समय के फिल्म मेकर शांताराम ने। शांताराम ने जितेंद्र को साइड एक्टर का काम दिया था।

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₹105 महीना तय हुई थी सैलरी

उस काम के लिए जितेंद्र के सामने एक शर्त रखी गई थी कि जब कोई कलाकार शूटिंग पर नहीं आएगा तभी उन्हें काम दिया जाएगा। उस काम के लिए जितेंद्र को प्रति महीने ₹105 देना तय किया गया था। परंतु जितेंद्र इतनी सैलरी में भी संतुष्ट थे और पूरी इमानदारी से काम किया करते थे। जितेंद्र के काम को देखकर शांताराम काफी प्रभावित हुए और आगे चलकर उन्होंने जितेंद्र को लेकर एक फिल्म बनाई।

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जितेंद्र की पहली फिल्म

शांताराम ने जितेंद्र को लेकर जो फिल्म बनाई उस फिल्म का नाम था गीत गाया पत्थरों ने। इस फिल्म के लिए जितेंद्र को ₹100 फीस दी गई थी। जितेंद्र को अच्छी फिल्म तो मिल गई थी परंतु उन्हें ब्रेक दिया गया था जिसके कारण उनके पैसे भी कम हो गए थे। वह पैसे प्राप्त करने के लिए भी जितेंद्र को करीब 6 महीने तक इंतजार करना पड़ा था। इसके बाद जितेंद्र को नहीं पहचान तब मिली जब साल 1967 में उनकी फिल्म फर्ज ने थिएटर में जलवा बिखेरा।

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इस फिल्म से हुए थे प्रसिद्ध

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फर्ज फिल्म का वह गीत भी काफी प्रसिद्ध हुआ जिसका नाम था मस्त बहारों का मैं आशिक। इसके बाद जितेंद्र में एक से बढ़कर एक फिल्में की जिसमें हमजोली और कारवां जैसी फिल्में शामिल है। हिट फिल्में देने का यह दौर चलता रहा और जितेंद्र सिद्दीकी नई ऊंचाइयों को छूते चले गए जितेंद्र को रवि कपूर से जितेंद्र नाम शांताराम ने ही दिया था। वर्तमान की बात की जाए तो जितेंद्र नदी बालाजी टेलिफिल्म्स के चेयरमैन है।

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Published by
Harsh

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