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आज है पंकज त्रिपाठी का जन्मदिन, सामान्य किसान परिवार में जन्मे, एक्टिंग से जीता लोगो का दिल

हिंदी सिनेमा में पंकज त्रिपाठी एक ऐसे कलाकार हैं जो बहुत ही सामान्य परिवार से आते हुए भी अपनी मेहनत और लगन के बल पर इतने कामयाब हुए। पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज के बेलसंद गांव में हुआ था। पंकज त्रिपाठी के पिता एक किसान है और पंकज त्रिपाठी भी अपने शुरुआती दिनों में खेतों में काम किया करते थे। परंतु खेतों में काम करते करते यह व्यक्ति आज इतना प्रतिष्ठित कैसे हो गया? तो आइए दोस्तों हम जानते हैं पंकज त्रिपाठी के जीवन की यात्रा।

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पंकज त्रिपाठी की प्राथमिक शिक्षा उनके गांव के स्कूल में ही हुई। गांव के दोस्तों के साथ ही खेलते कूदते पंकज त्रिपाठी बड़े हुए। पंकज त्रिपाठी बचपन में अपने गांव में होने वाले नाटकों में भी हिस्सा लिया करते थे। बाद में उच्च शिक्षा के लिए पंकज त्रिपाठी बिहार के पटना आ गए। परंतु उच्च शिक्षा प्राप्त करते समय भी पंकज का नाटकों की ओर रुझान काफी अधिक हुआ करता था। पंकज अपनी पढ़ाई में से समय निकालकर नाटक देखने के लिए साइकिल से जाते थे। पंकज जब 12वीं कक्षा में थे तब उन्होंने अंधा कानून नाटक देखा था जिसके बाद वह उस नाटक से इतने प्रभावित हुए कि साल 1996 आते-आते पंकज स्वयं एक कलाकार बन गए।

एक चैनल को दिए हुए इंटरव्यू में पंकज ने बताया कि वह रात में एक होटल में काम किया करते थे। नाइट शिफ्ट का उनका टाइम रात 11 से सुबह 7:00 बजे तक था। सुबह 7:00 बजे पंकज घर आकर 5 घंटे सोते थे और ठीक 2:00 बजे थिएटर में नाटक की प्रेक्टिस करने पहुंच जाते थे। पंकज ने बताया कि ऐसा उन्होंने लगातार 2 वर्षों तक किया। इसी दौरान पंकज ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लेने का निर्णय किया परंतु वहां पर एडमिशन के लिए कम से कम ग्रेजुएट होना जरूरी था। परंतु पंकज ने अपनी मेहनत और लगन से ग्रेजुएशन के पास कर लिया और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन ले लिया।

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उस समय पंकज एबीवीपी के विद्यार्थी कार्यकर्ता के रूप में भी काम करते थे इसी दौरान उन्हें जेल में भी जाना पड़ा था। बाद में पंकज ने एनएसडी की एग्जाम पास कर ली और फिर 16 अक्टूबर 2004 को पंकज अपने पास केवल ₹46000 लेकर मुंबई पहुंच गए। जितने पैसे भी अपने साथ लेकर आए थे वह पैसे अक्टूबर से दिसंबर महीने के बीच में पूर्ण रुप खत्म हो गए। पंकज के पास रोजाना का गुजारा करने के भी पैसे नहीं थे इसलिए अभी किसी भी प्रकार के छोटे-मोटे रोल करने से पीछे नहीं हटते थे जिसके कारण कम से कम उनके घर का किराया निकल जाए। पंकज ने अपने जीवन में संघर्ष करना नहीं छोड़ा। आगे चलकर पंकज को वासेपुर में काम करने का मौका मिला इसी दौरान पंकज के जीवन की सफलता को नया आयाम मिला और वे आज एक प्रसिद्ध कलाकार बन कर उभर गए।

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