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कौन है मुकुल रोहतगी, जिन्होंने आर्यन खान को मुंबई हाईकोर्ट से दिलवाई जमानत

बीते 2 अक्टूबर से जेल में बंद आर्यन खान को जमानत दिलवाने के लिए उनके द्वारा रखे गए वकीलों ने काफी मशक्कत की। आर्यन खान को जेल से छुड़ाने के लिए पहले सतीश मानशिंदे को रखा गया था और फिर अमित देसाई ने भी आर्यन खान का पक्ष रखा। परंतु वह दोनों आर्यन खान को जमानत नहीं दिलवा पाए जिसके बाद अब आजम खान की ओर से पैरवी करने पहुंचे मुकुल रोहतगी जिन्होंने आखिरकार आर्यन खान को मुंबई हाई कोर्ट से जमानत दिलवा दी।

जानकारी के अनुसार मुकुल रोहतगी काफी महंगे वकील है और वे एक केस पर सुनवाई के लिए 10 से 20 लाख रुपए फीस लेते हैं। यदि उनके द्वारा लड़े गए बड़े मामले देखे जाए तो साल 2002 के हुए गुजरात दंगों में गुजरात सरकार की ओर से अदालत में पक्ष रखने पहुंचे थे। उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी जस्टिस लोया की मौत के मामले में प्रमुख प्रॉसिक्यूटर रखा गया था। इस केस में महाराष्ट्र सरकार के द्वारा उन्हें 1.20 करोड़ रुपए फीस दी गई थी।

2011 से 2014 तक मुकुल रोहतगी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थे। जिसके बाद 2017 तक वो हमारे देश के अटॉर्नी जनरल भी रहे। मुकुल रोहतगी ने मुंबई के ही गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से पढ़ाई करके लॉ की डिग्री प्राप्त की थी। अपनी लॉ की पढ़ाई खत्म करने के तुरंत बाद ही उन्होंने प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। सबसे पहले मुकुल रोहतगी ने दिल्ली हाई कोर्ट के 36 वे चीफ जस्टिस योगेश कुमार सभरवाल के हाथ के नीचे प्रैक्टिस की। उसके बाद वे स्वयं निर्भर होकर साल 1993 में दिल्ली हाई कोर्ट के द्वारा उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा प्राप्त हुआ। साल 1999 में मुकुल रोहतगी एडीशनल सॉलीसीटर जनरल बन गए।

बता दें कि मुकुल रोहतगी के पिता अवध बिहारी रोहतगी भी दिल्ली हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं। इतना ही नहीं मुकुल रोहतगी की पत्नी भी एडवोकेट हैं। मुकुल रोहतगी भारत के पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता अरुण जेटली के भी करीबी मित्र रह चुके हैं। अरुण जेटली के निधन के बाद मुकुल रोहतगी ने उनके और अरुण जेटली के संबंधों के ऊपर काफी अच्छी बातें कही थी। उन्होंने बताया था कि वे और अरुण जेटली बहुत अच्छे दोस्त थे और कई बार उन्होंने कोर्ट में आमने-सामने एक दूसरे के खिलाफ केस भी लड़ी। मुकुल रोहतगी और अरुण जेटली का चेंबर अगल बगल में ही था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक दूसरे के लिए कड़े शब्दों का प्रयोग करने के बावजूद भी वे बाद में अच्छी दोस्ती निभाते थे।

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