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वाराणसी के नजदीक मिला 4 हजार साल पुराना शिवलिंग

भारतीय सभ्यता से जुड़े हुए कई कई ऐसे प्रमाण और चीजे है जो समय के साथ में हम लोगो को मिल रही है और ये इस बात को दर्शा रही है कि आज से हजारो साल पहले भी इस भूमि पर वो संस्कृति मौजूद थी जिसका बहुत ही अधिक आधुनिक रूप हम आज देख रहे है. आखिर जमीन में दब चुके सबूत जब बाहर आते है तो फिर उनको नकार भी कौन सकता है? अभी हाल ही में ऐसा ही कुछ एक और फिर से देखने में आया जो पूरे देश का और आस पास के लोगो का भी ध्यान आकर्षित कर रहा है.

भाभानियाव गाँव में मिला है 4 हजार साल पुराना शिवलिंग, रिसर्च टीम को और भी काफी कुछ मिलने की आशंका
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने वाराणसी से ही लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गाँव भाभानियाव में खोजबीन की और जमीन के नीचे खुदाई पर उन्हें एक पूरे गाँव की छाप  देखने को मिली जो पूरे 3500 वर्ष पुराना माना जा रहा है और इसमें एक शिवलिंग मिला है जिसकी कार्बन डेटिंग करने पर मालूम चला है कि ये भी पूरे 4 हजार वर्ष पुराना है और उस समय में लोग इसी की पूजा आदि करते थे, जो सबूत मिलते है वो तो यही ही बताते है.

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विश्व की सबसे पुराने शहरो में से एक है वाराणसी, कई टूटे फूटे पुराने अवशेष अभी मौजूद
वाराणसी विश्व के सबसे पुराने बसे हुए शहरो में से एक माना जाता है जो काफी अधिक आध्यात्मिक भी रहा है. यहाँ पर अभी भी पुरातत्व विभाग की कई टीमे मंदिरों और घरो को भी खोज रही है, इनमे इतिहास के पन्नो को तलाशने की खोज की जा रही है ताकि आज से हजारो वर्ष पहले इस धरती पर सभ्यता किस दिशा में बहती थी इस बारे में साक्ष्य प्राप्त किये जा सके.

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सिर्फ भारत की धरती पर ही नही विदेशी जमीनों पर भी मिलते रहे है शिवलिंग आदि के प्रमाण
वाराणसी में इस तरह की चीजे होना काफी आम है क्योंकि ये शहर ही सनातन सभ्यता से जुड़ा हुआ है लेकिन आपको जानकर के आश्चर्य होगा कि वियतनाम से लेकर कम्बोडिया तक कई दूर दराज के देश जहाँ पर वर्तमान में न के बराबर सनातन सभ्यता का अंश नजर आता है वहां भी जमीन की गहराई में से 2 हजार वर्ष पुरानी मूर्तियाँ और शिवलिंग आदि मिलते रहे है जो कई पुस्तको में लिखे हुए दावो को मजबूत करते है.

ये प्रमाण फिर भी अभी उतने अधिक स्पष्ट और सभ्यता को एक सही मायने में निरूपित करने के लिए पर्याप्त नही है लेकिन भारत का पुरातत्व विभाग हो या फिर बीएचयू की रिसर्च टीम हो हर कोई अपने अपने तरीके से इसमें खुदको लगा चुका है और जल्द इसके कुछ और अधिक बेहतर परिणाम मिलेंगे इसकी आशा कर सकते है.

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Published by
Yuvraj Solanki

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