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8 वर्ष की बच्ची ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखी चिट्ठी, गांव में स्कूल बस शुरू करवाने की मांग

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बीते लगभग डेढ़ वर्ष से कोरोनावायरस महामारी के कारण देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया का कामकाज बंद हो चुका था। ऐसे में हमारे देश में भी काफी कड़क लॉकडाउन लगाया गया था जिसके कारण सारी व्यवस्थाएं अपनी-अपनी जगह पर रुक गई थी। इसी बिच बच्चों की स्कूल भी बंद कर दी गई थी। परंतु अब धीरे-धीरे कोरोनावायरस का प्रभाव कम होता दिखाई दे रहा है जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन खोले जा चुके हैं और स्कूल भी खुलने लगी है।

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स्कूल खुलने पर अब सभी बच्चे अपनी-अपनी स्कूल में जाने लगे हैं और बच्चों में स्कूल जाने को लेकर नया उत्साह देखने को मिल रहा है। परंतु देश में ऐसे भी कई बच्चे हैं जिनकी स्कूल तो खुल गई है परंतु स्कूल तक पहुंचने के लिए उनके पास साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसी ही एक बच्ची की दास्तान तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से सामने आई है। एक बच्ची स्कूल जाने के लिए बस की सेवा उपलब्ध ना होने के कारण सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश को ही पत्र लिख दिया।

तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले की रहने वाली वैष्णवी 8 वर्ष की बच्ची है। इस बच्ची के गांव में बस की सेवा उपलब्ध नहीं है। बच्ची के पिता कोरोनावायरस के कारण ही संक्रमित हो गए थे और उनका दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद घर का पूरा कामकाज और खर्च मां के कंधों पर आ गया परंतु अपनी कमाई नहीं कर पाती जितने में वह बच्चों को बाल भी सके और उनकी पढ़ाई का भी खर्च उठा सके ऐसे में वैष्णवी ऑटो का खर्चा उठा कर स्कूल नहीं जा सकती थी।

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इसलिए वैष्णवी ने अपनी इस व्यथा को भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए पत्र लिखा। वैष्णवी के द्वारा की गई इस अपील को भारत के मुख्य न्यायाधीश वेंकटरमन जी ने भी गंभीरता से लिया और उन्होंने तेलंगाना रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन को वैष्णवी की शिकायत पर संज्ञान लेने के लिए कहा जिसके बाद तेलंगाना रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के द्वारा वैष्णवी और उसकी मां को फोन करके जल्द ही उसके गांव में बस सेवा शुरू करवाने का आश्वासन दिया गया।

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Published by
Harsh

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