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महिला हॉकी खिलाड़ी खेतो में मजदूरी करने और माड़ भात खाकर जीवन बिताने के लिए है मजबूर

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खिलाड़ी देश की प्रतिभा को देश ही नहीं बल्कि विश्व में सन्मान दिलाने में सक्षम होते है। हाल ही के दिनों में हमने देखा है किस प्रकार से भारत के खिलाड़ियों ने ओलंपिक्स में मेडल जीतकर पुरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। उन खिलाड़ियों को उस स्तर की जित दिलाने के लिए उनकी अपनी मेहनत ने तो साथ दिया ही है इसके साथ ही उन्हें मिली हुई ट्रेनिंग का भी उनकी जित में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। इन सबके बावजूद एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज जो खिलाड़ियों के शारीरिक पूर्णता के लिए आवश्यक होती है वो है उनका खान पान यानी उनका आहार।

एक खिलाडी उसके व्यक्तिगत स्तर पर चाहे कितनी भी मेहनत कर ले लेकिन यदि उसे उस स्तर का पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है तो उसकी मेहनत धरी की धरी रह जाती है। आज हम आपको ऐसी ही एक महिला हॉकी खिलाडी के बारे में बताने जा रहे है जो की खेल में तो बहुत माहिर है और बहुत ही लगन से खेलती है परंतु उनके आहार के विषय में बहुत ही चौका देने वाली खबर सामने आई है।

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News18

दोस्तों हम बात कर रहे है झारखण्ड के सिमडेगा की महिला हॉकी खिलाडी दीप्ती कुल्लू के बारे। वैसे तो खिलाड़ियों को प्रतिदिन दो लीटर दूध, अंडे, हरी सब्जी, मांस, दाल और फल आहार के रूप में दिए जाने चाहिए। दीप्ती कुल्लू जिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग ले रही थी उस ट्रेनिंग सेंटर की महिला खिलाड़ियों को आज नमक प्याज और माड़ भात खाकर गुजारा करना पड़ रहा है।

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक राज्य के कुल 3 ट्रेनिंग सेंटर है जिनमें कुल 75 महिला खिलाड़ियों का प्रशिक्षण चल रहा है। परंतु कोरोना महामारी के चलते सभी को अपने घर भेज दिया गया है। बता दे की इस दौरान राज्य सरकार की ओर से सभी खिलाड़ियों को पौष्टिक आहार के लिए प्रतिदिन 175 रुपये राशि भेजने का तय कीया गया था परंतु अभी तक उन खिलाड़ियों के खाते में पैसे पहुच नहि पाए है जिसके चलते उन खिलाड़ियों को माड़ भात खाकर और मजदूरी करके अपना गुजारा करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों का कहना है की उन्हें 17 महीनो से आहार की राशि नही मिली है।

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दीप्ती कुल्लू एक बहुत ही सामान्य परिवार से आती है। उनके पिता और मा खेतो में मजदूरी करते है। दीप्ती भी खेतो में मजदूरी करने जाती है। दीप्ती का कहना है की वे पूर्ण रूप से हॉकी को समर्पित खिलाड़ी है। वे अपने शरीर के पोषण की भरपाई माड़ भात से ही कर लेती है। बता दे की दीप्ती ने राज्य को कई गोल्ड और सिल्वर मैडल जितवा कर दिए है। परंतु पोश्टिक आहार न मिलने से खिलाड़ियों का भविष्य खतरे में आ सकता है।

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दीप्ती का कहना है की खेल संघ के पदाधिकारी कभी कभी ऊन्हे कुछ भोजन सामग्री देकर जाते है परंतु उतना आहार बहुत नाकाफी साबित होता है। खेल पदाधिकारियो का कहना है की उन्हें खेल प्रधीकरण की ओर से राशि नही मिल पा रही है जिसके कारण इतनी दिक्कते हो रही है। राज्य सरकार ने भी इस दिशा में जल्द से जल्द उचित कदम उठाने चाहिए अन्यथा देश में गोल्ड और सीलवर मैडल आने ही बंद हो जायेंगे।

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Published by
Harsh

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