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हेलीकॉप्टर में बिठाकर नवजात बच्ची का किया गया पैतृक घर में स्वागत, बेटी पैदा होने से खुश था परिवार

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देश जैसे-जैसे तरक्की करता जा रहा है वैसे वैसे लोगों की सोच भी अब बदल रही है। किसी समय बेटियों को दोयम दर्जे का स्थान देने वाला समाज अब राष्ट्रिय स्तर बेटियों के शौर्य और पराक्रम के कारण बेटियों को मान सम्मान की नजर से देख रहा है। राजस्थान के एक परिवार ने अपने घर में बेटी पैदा होने की खुशी के कारण बेटी का स्वागत इतने शानदार तरीके से किया कि हर कोई देखकर आश्चर्यचकित रह गया। इस परिवार ने अपनी नवजात बच्ची को ननिहाल से पैतृक घर लाने के लिए किराए पर हेलीकॉप्टर का उपयोग किया।

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धूमधाम से किया बेटी का स्वागत

राजस्थान के नागौर जिले में रहने वाले हनुमान प्रजापत ने अपने घर में बेटी पैदा होने की खुशी का उत्सव काफी धूमधाम से मनाया। हनुमान प्रजापत राजस्थान के नागौर जिले के निंबड़ी चांदावतां गांव के रहने वाले हैं पूर्णिया जानकारी के अनुसार बीते 3 मार्च के दिन उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी के समय हनुमान प्रजापत की पत्नी उसके मायके में ही थी। परंतु अब मायके से हनुमान प्रजापत की पत्नी अपनी बेटी को लेकर ससुराल आने वाली थी।

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हेलीकॉप्टर में बिठाकर घर लाए बेटी को

पहली बार अपनी बेटी के कदम अपने घर में पढ़ने वाले हैं यह सोचकर हनुमान प्रजापत इस पल को बहुत ही यादगार बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को ननिहाल से अपने पैतृक घर लाने के लिए किराए के हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया। नन्ही बच्ची अपनी मां के साथ हेलीकॉप्टर में बैठकर जब अपने पैतृक घर चांदावता पहुंची तो आस-पड़ोस के सभी लोग देख कर हैरान हो गए। कोई व्यक्ति बेटी पैदा होने की खुशी में इतना अदभुत काम कर सकता है यह शायद पहली बार लोगों को देखने मिल रहा था।

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बेटे और बेटों में अंतर नहीं करते हनुमान प्रजापत

हनुमान प्रजापत ने बताया कि उन्हें बेटी पैदा होने पर बहुत ज्यादा खुशी हो रही है। हनुमान प्रजापत के पिता मदनलाल जी ने भी बेटी पैदा होने और उसका पहला जन्मदिन मनाने के लिए कुछ विशेष तरीका अपनाने की बात कही थी। यही कारण रहा कि हनुमान प्रजापत अपनी बेटी का स्वागत अपने घर में अनोखे तरीके से करना चाहते थे। बता दें कि ननिहाल से पैतृक घर का अंतर लगभग 40 किलोमीटर है। इस अंतर को पार करने में हेलीकॉप्टर को केवल 10 मिनट लगे। जैसे ही बेटी का आगमन हुआ तो पूरा परिवार हर्ष और उल्लास से झूम उठा।

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Published by
Harsh

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