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हॉस्पिटल में नही मिला बेड तो बच्चो ने कार में ही किया इलाज, करोना से ठीक हो गयी माँ

कोरोना ने एक बार फिर पूरे देश में तहलका मचा दिया. पिछली बार हमने मास्क, सेनेटाईजर और सामाजिक दूरी से इसका सामना किया था. फिर वैक्सीन भी आ गयी और केस कम होने लगे. लेकिन फिर भी हमने मास्क पहनना नहीं छोड़ा. लेकिन इस बार कोरोना कुछ अलग ही लक्षणों के साथ वापस आया है. विशेषज्ञों की माने तो इस बार यह हवा से भी फ़ैल रहा है. इस बार सावधानिया पिछली बार की तुलना में अधिक रखने की जरुरत है. सरकार की गाइडलाइन का पालन करना भी जरुरी है, क्योंकि हमें कोरोना से लड़ कर उसे हराना है.

उत्तर प्रदेश के लखमीपुर खीरी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर जरुर सवाल उठाएंगे. दरअसल लखीमपुर खीरी से एक भाई-बहन अपनी माँ के डायलिसिस के इलाज़ के लिए 20 अप्रैल को लखनऊ आ पहुचे. उनकी माँ को उस दिन हल्का सा बुखार भी आया हुआ था. उन्होंने सोचा डायलिसिस के इलाज़ के बाद वे तुरंत घर को लौट जायेंगे, लेकिन जब वे लोग अस्पताल गए. तो बुखार से ग्रस्त माँ को देख कर वहा इलाज़ करने से मना कर दिया गया. जिसके बाद वे लोग दूसरे अस्पताल में गये. वहा पर भी यही हाल था, तो फिर दोनों भाई-बहनों ने माँ की कोरोना रिपोर्ट करवाने की सोची और ऐसा ही किया. टेस्ट के बाद उनकी माँ पॉजिटिव पाई गई. इस बात ने उन्हें और घबरा दिया और अस्पताल में भी उन्हें बेड नही मिल पा रहा था. दूसरी तरफ माँ का ऑक्सीजन लेवल भी कम हो गया था, जिसकी वजह से परेशानी बढ़ गई थी.
पिताजी ने पहुचाई ऑक्सीजन

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जब मामला सीरियस हो गया था तब पायल और आकाश नाम के दोनों भाई-बहनों ने विवेक से काम लिया और अपने दोस्तों से संपर्क किया और किसी भी तरह से ऑक्सीजन की व्यवस्था कर दी. 23 अप्रैल की सुबह में अपने बच्चों के कहे अनुसार वे ऑक्सीजन के 5 कैन ले आये.

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कार को कोरोना वार्ड बनाकर किया माँ का इलाज़
जब ऑक्सीजन मिल ही गई थी तो उन दोनों ने अपनी कार की पीछे की सीट को ही बेड बना दिया और कार की छत पर ऑक्सीजन कैन रख दिया. इसके बाद माँ को पीछे वाली सीट पर लिटाकार उन्होंने ऑक्सीजन दी. इधर माँ का बुखार और बढ़ गया था. ऑक्सीजन के मिल जाने के कारण उनका ऑक्सीजन लेवल धीरे-धीरे सही होने लगा था. इसके बाद उन्हें आखिरकार 24 अप्रैल को एक अस्पताल में बेड मिल ही गया. सही इलाज़ मिल जाने के कारण वह ठीक हो गई और 30 अप्रैल को उन्हें घर जाने की अनुमति मिली.
आकाश की बहन पायल ने बताया कि माँ के इलाज़ की दौड़भाग में उसका भाई आकाश भी संक्रमित हो गया. लेकिन डॉक्टर से सही इलाज़ मिलने से वह ठीक हो गया. अब वह अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख रहे है.

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