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जिन्दगी में सफल होना है, तो भगवद गीता की ये 10 बाते माननी ही पड़ेगी

भगवद गीता का हिन्दू धर्म में बहुत ही अधिक महत्त्व माना गया है और लोग इसे अधिक पूजनीय भी मानते रहे है इस बात में कोई भी संशय नही है मगर सबसे बड़ी बात यहाँ पर ये है कि क्या लोग इसकी बातो को जीवन में वाकई में उतारते है? चलिए आज हम आपको बताते है गीता से मिलने वाली कुछ एक सीखे जो आपको मालूम होनी चाहिए और अगर आप उनको जीवन में उतारते है तो फिर आप जीवन में आगे चलकर के बहुत ही बड़े स्तर पर सफलता को भी प्राप्त करते है और ये काफी जरूरी भी है.

कर्म करो फल की चिंता मत करो

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गीता का सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण उपदेश यही है कि कर्म करो फल की चिंता मत करो. अगर आप सत्कर्म करते है और जीवन में लोगो की भलाई करते है, अपनी मेहनत करते है तो फिर जीवन में आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नही सकता है लेकिन अगर आप कर्म ही न करे या फिर बुरे कर्म करे तो आपको अच्छे फल की प्राप्ति नही हो सकती. बस आप अच्छे कार्य करे और उसका फल प्राप्त होने की चिंता ईश्वर पर छोड़ दे.

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आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही उसका मरण होता है

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हम सभी इस शरीर के लिए रोते है जबकि असल में तो हम सबका अस्तित्व आत्मा ही है और सत्यता को परखा जाए तो आत्मा न तो कभी जन्म लेती है और न ही वो कभी समाप्त होती है, वो तो ईश्वर का अंश है जो अनादिकाल तक इसी तरह से घूमती रहती है और विभिन्न जीवनों में विचरण करती है इसलिए शरीर के जाने का शोक कभी भी मत मनाओ. ये सब होना ही है.

व्यक्ति ही स्वयं का मित्र है और व्यक्ति ही स्वयं का शत्रु

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किसी भी व्यक्ति का सबसे अच्छा दोस्त व्यक्ति खुद ही होता है और खुद ही सबसे बड़ा दुश्मन भी होता है. आप दुनिया से उतना अधिक नही समझते है जितना खुदके समझाने से समझ जाते है इसलिए अगर आप खुदसे अकेले में कुछ विचारों का मंथन कर रहे है तो नकारात्मकता की जगह कुछ सकारात्मक होने की कोशिश करिए, सब कुछ अपने आप से ही अच्छा और सही हो जाएगा.

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परिवर्तन ही संसार का नियम है

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अक्सर हम लोग एक ही तरह का जीवन जीने के या फिर एक ही चीज के या एक ही इंसान के आदि हो जाते है लेकिन ये बात प्रकृति के नियम के खिलाफ है क्योंकि ये संसार ऐसा है जहाँ पर कुछ भी स्थिर नही है, हर चीज पल पल परिवर्तित होती है चाहे वो धन हो, परिवार हो, जीवन हो, प्रेम हो या फिर आपके जीवन से जुडी छोटी से छोटी वस्तु या व्यक्ति हो. आप एक क्षण में करोड़पति हो जाओ और एक क्षण में रंक हो जाओ ये सब कुछ इसी परिवर्तनशील संसार में ही संभव है. ये काफी महत्त्वपूर्ण है.

खाली हाथ आये थे और खाली हाथ जाओगे

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आप जब जन्म लेते है तब आपके हाथ में कुछ भी नही होता है और न ही आप धनी बनकर के आते हो, आपको जो भी अर्जन करना है वो यही पर करते हो और जब आपका देहांत होता है तब भी आप अपने साथ कुछ भी लेकर के नही जा सकते तब आपको लौटते समय सब कुछ यही पर छोड़कर के ही जाना होगा.

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संदेह और प्रसन्नता का कोई मेल नही

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जीवन में जब आप कोई कार्य जीते है कोई रिश्ता बनाते है या फिर किसी भूमिका में होते है तो फिर उस पर संदेह कभी भी न करे क्योंकि अगर आप ऐसा करते है तो फिर आप कभी भी खुश रह ही नही सकेंगे और संदेह के साथ में आपको कभी भी प्रसन्नता की प्राप्ति नही हो सकती है.

मनुष्य के विचार ही उसके गर्त में जाने या फिर ऊपर उठने का कारण बनते है

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जो व्यक्ति जैसा सोचता है वो वैसा ही बन जाता है और उसी के अनुरूप कार्य करता है.  अगर वो बुरा सोचता है और उसके मन में कोई गलत भावना है तो फिर वो उसके अनुरूप ही बन जाएगा और उसके मन में अच्छी भावना है तो उसका पूरा जीवन ही अच्छा बन जाएगा और सब कुछ उसी के अनुरूप ही कार्य भी करता है. अधिकतर लोग इसे अपने जीवन में महसूस भी कर सकते है.

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जो हो रहा है होगा या हुआ अच्छा होगा

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आपके जीवन में जो हुआ है, जो हो रहा है या फिर आगे जो भी होगा सब कुछ अच्छे के लिए ही होगा. ईश्वर आपके लिए सदा कुछ न कुछ अच्छा सोचकर के रखता है बस आपके लिए जरूरत होती है उसे पहचानकर के उसके अनुसार कार्य करने की और फिर उसके अनुसार ही आपको काम करने की जरूरत होती है और ये काफी अधिक महत्त्वपूर्ण बात होती है जो हमें अपने जीवन में अपने ऊपर से या फिर अपने कर्मो के ऊपर से भरोसा उठने से बचाने का कार्य करती है.

अहंकार से सिर्फ विनाश होगा 

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जब भी व्यक्ति को अपने अहंकार में डूब जाता है तो फिर उसका अंत निश्चित है क्योंकि अहम तो दुर्योधन में भी अपनी सेना को लेकर के खूब था लेकिन जब आती है विजय की तो हमेशा जो विनम्र होता है वही जीत को प्राप्त करता है और अपने जीवन में सफलता की तरफ आगे भी बढ़ता है.

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क्रोध मनुष्य को अन्दर से खोखला कर देता है 

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व्यक्ति को क्रोध को साधना सबसे पहले आना चाहिए क्योंकि क्रोध एक ऐसी चीज है जो इंसान को अन्दर तक खोखला कर देने की क्षमता रखती है यही नही आप जो कार्य अच्छे से निपुणता के साथ में कर सकते थे उसे भी आप नही कर पायेंगे क्योंकि क्रोध आपकी क्षमता को लगभग समाप्त ही कर देता है.

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Published by
Yuvraj Solanki

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