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इंजीनियर की नौकरी छोड़ बेचने लगे गाय का दूध और गोबर, कमाते हैं लाखों रुपए प्रति महीना

आज के समय में एक नया ही ट्रेंड समाज में बना हुआ है कि जल्द से जल्द पढ़ाई करो और नौकरी पर लगो। नौकरी पर लगने के लिए कई विद्यार्थी जी तोड़ मेहनत करते हैं परंतु सभी लोगों को नौकरी प्राप्त नहीं हो पा सकती है। ऐसे में हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर गाय का गोबर और गोमूत्र बेचने का बिजनेस शुरू किया जिससे वे लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।

दक्षिण कन्नड़ के पुत्तुर में रहने वाले जयगुरु आचार केवल 26 वर्ष के युवा है। जय गुरु ने दक्षिण कन्नड़ के पुत्तुर स्वामी विवेकानंद कॉलेज आफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वे सिविल इंजीनियर बन गए। बाद में कुछ वर्षों तक वे एक प्राइवेट फॉर्म में नौकरी पर भी रहे जिससे उन्हेंकरीब 2 लाख प्रति महीना तनख्वाह प्राप्त होती थी। परंतु जयगुरु का उस फॉर्म में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। जब भी अपने घर आते तो अपने पिता के साथ अपने पारंपारिक बिजनेस में हाथ बटाते।

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इसी बीच जयगुरु के मन में विचार आया कि क्यों ना अपने पशुपालन के बिजनेस में ही कुछ नया करके खुद का काम शुरू किया जाए। साल 2019 में जयगुरु ने अपनी नौकरी छोड़ने का निर्णय किया और वे अपने पशुपालन के बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके ढूंढने पर विचार करने लगे। ऐसे में वे पटियाला गए और वहां से गोबर को सुखाने की मशीन लेकर आए। जयगुरु अपने फार्म पर निकला हुआ गोबर सुख आते हैं और उसे बेचकर काफी पैसा कमाते हैं। जयगुरु के द्वारा बेचा जा रहा या सुखा गोबर उनके आसपास के गांव वाले लोग ही खरीद लेते हैं।

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इतना ही नहीं जयगुरु अपने फार्म पर से निकलने वाला गंदा पानी और गोमूत्र सहित उसमें गोबर मिलाकर एक गोल बनाते हैं जो की खेती में और ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए उर्वरक के रूप में काफी उपयुक्त साबित होता है। जयगुरु के द्वारा बनाया जाने वाला यह उर्वरक आसपास के किसान उनसे खरीद लेते हैं। यह उर्वरक बेच कर भी जयगुरु की अच्छी खासी कमाई हो जाती है। इतना ही नहीं जयगुरु अपने फार्म पर गोंडजाल नाम का एक विशेष उर्वरक भी बनाते हैं जिसे मरे हुए जानवरों के शरीर को गला कर बनाया जाता है।

गोंड जाल बनाने के लिए जब कभी उनकी गौशाला में कोई पशु मर जाता है तो उसे एक बड़े टैंक में डाल दिया जाता है। उसके साथ उसमें गौमूत्र पानी और छाछ के साथ अन्य कई इनग्रेडिएंट्स डाले जाते हैं। इन सभी चीजों को करीब 6 से 7 महीने तक उसी टैंक में जलाया जाता है जो बाद में लिक्विड फॉर्म में आ जाता है। यह भी खेती में उर्वरक के लिए काफी उपयुक्त साबित हुआ जिसके कारण इसे खरीदने के लिए जयगुरु के पास लोगों की लाइन लग गई।

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जयगुरु के पास 100 से ज्यादा पशु है और उनका फार्म 10 एकड़ की ज़मीन में फैला हुआ है। वह हर महीने 700 लीटर से ज़्यादा दूध बेचते हैं और करीब 30 किलो तक घी भी बेचते है। जयगुरु का पूरा परिवार इस काम में उनका सहयोग करता है। जयगुरु ने बताया कि इस बिजनेस से वे प्रति महीना करीब 10 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से इस बिजनेस में समय पूरा देना पड़ता है लेकिन आप खुद के मालिक खुद बन जाते हो और कमाई भी अच्छी खासी हो जाती है जिसके कारण उन्हें काफी संतुष्टि और खुशी मिलती है।

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